एक बैसाख की पूर्णिमा है और मन बुद्ध होना चाहता है। एक बैसाख की पूर्णिमा है और मन बुद्ध होना चाहता है।
मेरा साथ और विश्वास बनकर तुम रहो करीब मेरे। मेरा साथ और विश्वास बनकर तुम रहो करीब मेरे।
कुछ जग से है नही चाह, बस प्रभु करुणा पर जीना है।। कुछ जग से है नही चाह, बस प्रभु करुणा पर जीना है।।
प्रेम दया और करुणा वाला, मन मलमल सा कोमल हो। प्रेम दया और करुणा वाला, मन मलमल सा कोमल हो।
माँ तेरी सीरत ऐसी, देवी की मूरत में तेरी ममता दिखती है। माँ तेरी सीरत ऐसी, देवी की मूरत में तेरी ममता दिखती है।
ईर्ष्या से नहीं बल्कि प्रेम, करुणा, नम्रता और भक्ति से; अंत में, प्यार अंतहीन है। ईर्ष्या से नहीं बल्कि प्रेम, करुणा, नम्रता और भक्ति से; अंत में, प्यार अंतही...